शेर-ओ-शायरी

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फरागत से दुनिया दम भर न बैठो,
अगर चाहते हो फरागत जियादा।

-ख्वाजा हाली


1.फरागत - (i) फुर्सत, अवकाश, छुट्टी (ii) मुक्ति, नजात (iii) सुख, आराम, इत्मीनान


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फलक देता है जिसको ऐश उसको गम भी देता है,
जहाँ बजते हैं नक्कारे, वहीं मातम भी होते हैं।

-'दाग' देहलवी

 

1.फलक - आकाश, आसमान, अर्श

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फस्ले -गुल की बरहनगी है वह,
लोग जिसको खिजाँ समझते हैं।

-अब्दुल हमीद'अदम'


1.फस्ले–गुल - वसंत ऋतु, बहार का मौसम 2. बरहनगी - नग्नता, नंगापन 3.खिजाँ - पतझड़ की वस्तु

 

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फूल बनने की खुशी में मुस्कुरायी थी कली,
क्या खबर थी यह तबस्सुम मौत का पैगाम है?


1.तबस्सुम- मुस्कान।
 

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