शेर-ओ-शायरी

<< Previous  ज़िन्दगानी (Life) Next>>

फूलों के इन्तिजार में कांटों से भी निभाइए,
यानी खुशी के वक्त गम का शऊर चाहिए।


*****

 

बकद्रे-होश हर इक को यहाँ रज मिलता है,
यहाँ सकून से रहते हैं सिर्फ दीवाने।


1.बकद्रे-होश - होशमंद, संवेदनशील

 

*****

बहार फूलों की नापाइदार कितनी है,
अभी तो आई, अभी उड़ गई हंसी की तरह।

-'जलील' मानिकपुरी


1.नापाइदार - अस्थायी, थोड़े समय तक रहने वाला

 

*****
 

बहुत कुछ पांव फैलाकर भी देखा 'शाद' दुनिया में,
मगर आखिर जगह हमने न दो गज के सिवा पाई।

-'शाद' अजीमाबादी
 

*****

<< Previous    page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28- 29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45  Next>>