शेर-ओ-शायरी

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इन्सान की बदबख्ती अन्दाज से है बाहर,
कमबख्त खुदा होकर बंदा नजर आता है।


1.बदबख्ती - दुर्भाग्य, बदकिस्मती

 

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इशरतकदे को खाना-ए-वीरां बनायेंगे,
छोटे-से-अपने घर को बयाबां बनायेंगे।

-मिर्जा गालिब


1.इशरतकदा - रंगभवन, रंगमहल, यशमहल, इशरतखाना या इश्रतगाह

 2.खाना-ए-वीरां - वीरान घरबार 3.बयाबां - वन, जंगल, अरण्य, कानन
 

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इश्के-लामहदूद जब तक रहनुमा होता नहीं,
जिन्दगी से जिन्दगी का हक अदा होता नहीं।

- जिगर मुरादाबादी

1.लामहदूद - जिसकी कोई हद न हो, असीमित, बेहद, जो घेरा न जा सके, जिसकी सीमाएँ निश्चित न हो।

2.रहनुमा - पथप्रदर्शक, रास्ता बताने वाला, आगे-आगे चलने वाला

 

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इस जमीं पै जिन्का था दबदबा कि बुलंद अर्श पै नाम था,
उन्हें यूँ फलक ने मिटा दिया कि मजार तक का निशां नहीं।

-चकबस्त लखनवी


1.दबदबा - (i) रोबदाब, प्रताप, तेज, प्रभाव (ii) आतंक 2.बुलंद - ऊँचा

3.अर्श - आकाश, फलक, आसमान 4. फलक - आकाश, गगन, अंबर, ब्योम

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