शेर-ओ-शायरी

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मैं मैकदे की राह से होकर निकल गया,
वरना सफर हयात का काफी तवील था।

- अब्दुल हमीद 'अदम'


1.मैकदा- शराबखाना 2.हयात- जिन्दगी 3.तवील- लंबा

 

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मैंने पूछा था कि जिन्दगी क्या है,
हाथ से गिर कर जाम टूट गया।

-जगन्नाथ 'आजाद'
 

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मौत अंजामे-जिन्दगी है मगर,
लोग मरते हैं जिन्दगी के लिये।

-'साहिल' मानिकपुरी


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मौत का तो इलाज हो शायद,
जिन्दगी का कोई इलाज नहीं।
 

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