शेर-ओ-शायरी

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मौत जब तक नजर नहीं आती,
जिन्दगी राह पर नहीं आती।

-'जिगर' मुरादाबादी
 

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मौत ने भी जानना चाहा मगर,
जिन्दगानी का भरम खुलता नहीं।

-'फिराक' गोरखपुरी
 

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मौत भी जिन्दगी में डूब गई,
ये वो दरिया है जिसका थाह नहीं।
 

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मौत से क्यों इतनी दहशत, जान क्यों इतनी अजीज,
मौत आने के लिये है, जान जाने के लिये है।

-वफा

 

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मौत है वह राज जो आखिर खुलेगा एक दिन,
जिन्दगी है वह मुअम्मा, कोई जिसका हल नहीं।

-अफसर मेरठी


1.मुअम्मा - प्रतियोगिता, पहेली

 

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मौतो-हस्ती की कशाकश में कटी उम्र तमाम,
गम ने जीने न दिया, शौक ने मरने न दिया।


1.कशाकश - खींचा-खींची, आपाधापी

 

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