शेर-ओ-शायरी

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यह बज्मे-फलक इससे होगी न सूनी,
अगर टूट जायेंगे दो चार तारे।

-'अफसर' मेरठी


1.बज्म- महफ़िल 2.फलक - आकाश, आसमान, अम्बर


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यह माना जिन्दगी है चार दिन की,
बहुत होते हैं यारों चार दिन भी।

-फिराक गोरखपुरी
 

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यह सब फरेब है नजरे-इम्तियाज का,
दुनिया में वरना कोई भी अच्छा बुरा नहीं।

-आसी उल्दानी


1.नजरे-इम्तियाज - विभेद करने वाली नजर


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यह है बहते हुए दरिया की आवाज,
वहीं जाना है आये थे जहाँ से।

-साकिब लखनवी
 

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