शेर-ओ-शायरी

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इसी दुनिया में दोजख है,इसी दुनिया में जन्नत है,
इसी दुनिया में होते हैं, सभी के फैसले यारों।


1.दोजख - जहन्नुम, नरक

 

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उजाले जश्ने-बहाराँ के खूब हैं लेकिन,
अंधेरे बीते हुए शब के याद आते हैं।
-कृष्ण बिहारी 'नूर'


1.जश्ने-बहाराँ - बहारों (यानी खुशियों) के जश्न

2.शब - रात, रजनी, यामिनी, रात्रि

 

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उठ गया कैस, उठ गई लैला,
पर्दा अब तक न उठा महफिल का।

-मुज्तर मुजफ्फरी

 

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उठा सके आदमी तो पहले नजर से अपनी नकाब उठाए,
जमाने भर की तजल्लियों से नकाब उल्टी हुई मिलेगी।

-नवाब झांसवी


1.नकाब - पर्दा, घूँघट, ओट, आड़ 2. तजल्ली - (i) आभा, प्रकाश, नूर, रौशनी (ii) प्रताप, जलाल (iii) अध्यात्मज्योति, नूरे-हक

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