शेर-ओ-शायरी

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सकूँ है मौत यहाँ जौके-जुस्तजू के लिये,
यह तिश्नगी वह नहीं है जो बुझाई जाती है।

-'जिगर' मुरादाबादी


1.जौके-जुस्तजू - तलाश की चाहत या शौक

2. तिश्नगी - प्यास, पिपासा, तृष्णा
 

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समझ तो ली है दुनिया की हकीकत,
मगर अब अपना दिल बहला रहा हूँ।

 

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समझ सके हैं वही हयात का मकसद,
मुसीबतों में भी जो मुस्कुराये है।

-ताहिरा


1.हयात - जिन्दगी, जिन्दगानी

 

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सीनए-नय पै जो गुजरती है,
वह लबे-नयनवाज क्या जाने।


1.सीनए-नय - बांसुरी का सीना 2.लबे-नयनवाज - बजाने वाले के होंठ

 

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