शेर-ओ-शायरी

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सुनता हूँ बड़े शौक से अफसाना-ए-हस्ती,
कुछ ख्वाब है कुछ अस्ल है कुछ तर्जे-अदा है।

-असगर गौण्डवी

 

1.अफसाना - दास्तान, कहानी


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सुनेगा कौन मेरी चाकदामानी के अफसाने,
यहाँ सब अपने-अपने पैरहन की बातें करते हैं।


1.चाकदामानी - दामन की फटन जो प्रेम के आवेश में फाड़ा जाता है, (यानी गम, तकलीफ) 2.पैरहन - (i) वस्त्र, वसन, लिबास (ii) कुर्ता, कमीज
 

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सुबहे-इशरत, शामे-गम के बाद आती है नजर,
राज यह समझा है मैंने जाके जिन्दानों के पास।

-'अलम' मुजफ्फरनगरी


1.सुबहे-इशरत - आनन्द या खुशी की सुबह

2.जिन्दान या ज़िन्दां - जेल, कारागार, कैदखाना

 

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हम उसी जिन्दगी के दर पै हैं,
मौत है जिसके पासबानों में।


1.दर - दरवाजा, द्वार 2.पासबान - द्वारपाल, निगरानी करने वाला
 

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