शेर-ओ-शायरी

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हमनशीं! मुझको नहीं राहत से कोई दुश्मनी मगर,
दिल को क्या कहिए कि जालिम खूगरे-आलाम है।

-नादिर-उल-कादिरी


1.हमनशीं - साथ बैठने वाला, मित्र 2. खूगर - आदी, अभ्यस्त

3.आलाम - मुसीबतें, कष्ट, तकलीफें


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हमने अपने आशियाँ के वास्ते,
जो चुभें दिल में वही कांटे चुने।

-'रियाज' खेराबादी
 

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हमने कांटों को भी नरमी से छुआ है लेकिन,
लोग बेदर्द है फूलों को मसल देते हैं।
 

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हयात एक मुस्तकिल गम के सिवाय कुछ भी नहीं शायद,
खुशी भी याद आती है तो आंसू बन के आती है।

-'साहिर' लुधियानवी


1.हयात – जिन्दगी

2.मुस्तकिल - (i) अटल, दृढ़, स्थायी, चिरस्थायी (ii) निरन्तर, लगातार

 


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