शेर-ओ-शायरी

<< Previous  ज़िन्दगानी (Life)  Next >>

हर मुकाम के आगे मुकाम है मेरा,
हयात जौके-सफर के सिवाय कुछ भी नहीं।

-मोहम्मद इकबाल


1.हयात - जिन्दगी, जिन्दगानी

2. जौके-सफर - सफर (यानी चलते रहन) का शौक

*****


हर खिजाँ के गुबार में हमने कारवाने-हयात देखा है,
कितने पशमीनापोश जिस्मों में रूह तार-तार देखा है।

-अफसर मेरठी


1.खिजाँ - पतझड़ की ऋतु 2.गुबार - धूल, रज 3. कारवाने-हयात - जीवन का कारवाँ 4. पशमीनापोश - कीमती दुशालों में ढके

*****

हर इक जर्रेमें जिसके सैकड़ों गुलशन हैं पोशीदा,
जुनूं की राह में इक ऐसा भी वीराना आता है।

-'अलम' मुजफ्फरनगरी


1.ज़र्रा - कण, रज 2. पोशीदा - छिपे हुए
3.जुनूं- उन्माद, पागलपन 3.वीराना - वीरान या निर्जन स्थान, वन, जंगल


*****


हर इक शख्स अदम से तने-उरियाँ लेकर,
शहरे-हस्ती में खरीदारे - कफन आता है।


1.अदम - परलोक, यमलोक 2. तने-उरियाँ - नंगा शरीर


*****

 

<< Previous    page -1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-2829-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45  Next>>