शेर-ओ-शायरी

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हसरतों का सिलसिला कब खत्म होता है 'जलील',
खिल गये जब गुल तो पैदा और कलियाँ हो गईं।

-'जलील' मानिकपुरी
 

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हुए जो खूगरे-गम ऐश का उन पर असर क्या हो?
खुशी को वो खुशी समझें जो गम को गम समझते हैं।

-जोश मल्सियानी


1.खूगरे-गम - गम सहने के आदी

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हूँ मैं भी तमाशइए - नैरंगे - तमन्ना,
मतलब नहीं कुछ इससे कि मतलब बर आवे।

-मिर्जा 'गालिब'


1.तमाशइए-नैरंगे-तमन्ना - तमन्नओं के फरेब का तमाशाई

(तमाश देखने वाला) 2.बर - सफल, कामयाब
 

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हो दौरे-गम कि अहदे-खुशी, दोनों एक हैं,
दोनों गुजश्तनी हैं, खिजां क्या, बहार क्या?

-त्रिलोक चन्द 'महरूम'


1.दौरे-गम - गमों का दौर 2. अहदे-खुशी - खुशी का वक्त 3.गुजश्तनी - बीत जाने वाला, गुजरने योग्य 4. खिजां - पतझड़ की ऋतु


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