शेर-ओ-शायरी

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ऐ दिल जो हो सके तो लुत्फे-गम उठा ले,
तन्हाइयों में रो ले, महफिल में मुस्कुरा ले।
जिस दिन यह हाथ फैले अहले-करम के आगे,
ऐ काश उसके पहले हमको खुदा उठा ले।
-'शमीम' जयपुरी


1.अहले-करम - मेहरबानी करने वाले

 

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कभी आशियाँ की तमन्ना मुसलसल,
कभी आशियाँ तक गये, लौट आये।
-'कमर' शेरवानी


1.मुसलसल – लगातार,निरंतर

 

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कभी मौजे-दरिया ने मुड़कर न देखा,
सफीना लगा कौन थक कर किनारे।
-आनन्द नारायण 'मुल्ला'


1.सफीना - नाव, नौका

 

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कम न थी ये आलमे-हस्ती किसी सूरत मगर,
वुसअतें दिल की बढ़ीं इतनी कि जिन्दा हो गयीं।
-जिगर मुरादाबादी


1.आलम - संसार, दुनिया 2.हस्ती (i) अस्तित्व, दुनिया (ii) जीवन, प्राण, जिन्दगी 3.वुसअतें - विशालताएं, लम्बाई-चौड़ाई (तमन्नाओं की)
4.ज़िन्दां - कारागार, कैदखाना, कारागृह


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