शेर-ओ-शायरी

आलम बस्तवी (Aalam Bastavi)

क्यों आज बेपिये ही बहकने लगा हूँ मैं,
 
अपनी नजर के मस्त इशारों से पूछ लो।
 

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गुलशन के दिलफरेब नजारों से पूछ लो,
 
मेरा न हो यकीं तो बहारों से पूछ लो।
 
हर शै में रौशनी है तुम्हारे जमाल की,
 
मेरा न हो यकीं तो सितारों से पूछ लो।

 1.
शै - चीज

2.जमाल - (i) सौन्दर्य, खूबसूरती, हुस्न (ii) मुख्कान्ति ,मुखाभा
 

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हर शै में रौशनी है, तुम्हारे जमाल की,
 
मेरा न हो यकीं तो बहारों से पूछ लो।

 1.
शै - चीज, वस्तु, पदार्थ 2.जमाल - (i) सौन्दर्य, सुन्दरता, रूप, हुस्न (ii) शोभा, छटा, छवि (iii) मुखकांति, मुखाभा

 

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