शेर-ओ-शायरी

आनन्द नारायण मुल्ला  (Aanad Naraian Mulla) Next>>

अमल-अमल ही रहेगा, सिला मिले न मिले,
 
जबाने- खत्क पै है, नामे -कोहकन  बाकी।

 1.
अमल- कर्म, कार्य 2.सिला - (i) पुरस्कार, इनाम (ii) उपहार, तोहफा

3.जबाने-खत्क - जनता की जुबान 4.नामे-कोहकन - 'शीरी' के प्रेमी फर्हाद की उपाधि जिसने शीरी की आज्ञा से पहाड़ काटते हुए अपने प्राण दे दिए, पहाड़ काटने वाला
 

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अरमां को दबाते हैं तो मुसीबत में है  जां और,
 
शोला  को  दबाते हैं  तो उठता  है धुंवा और।
 

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अश्क बनकर आई हैं वह इल्तिजाएं चश्म तक,
 
जिनको कहने के  लिए होठों पै गोयाई  नहीं।

 1.
इल्तिजाएं - प्रार्थनाएं, दरखास्त 2.चश्म - आँख, नेत्र

3.गोयाई - बोलने की ताकत
 

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उसी को जिसने न की भूलकर भी बात कभी,
 
बगैर याद किये कट न सकी एक रात कभी।

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