शेर-ओ-शायरी

आरिफ बीकानेरी (Aarif Bikaneri)  

तू  राह में सोता है वो  भी तो  मुसाफिर  है,
 
मंजिल पर पहुंचकर भी जो आराम नहीं करते।

*****

दौरे-खिजाँ से अब तो बहला रहे हैं दिल को,
कांटों में फँस  गये हैं फूलों की दोस्ती में।

1.
दौरे-खिजाँ - पतझड़ का मौसम

 

*****