शेर-ओ-शायरी

                              आतिश (Aatish)

दुश्मन भी हो तो दोस्ती से पेश आये हम,
 
बेगानगी से  अपना  नहीं आश्ना मिजाज।

 1.
बेगानगी - (i) परायापन (ii) अनजानापन, ज्ञान का न होना, बेइल्मी 2.आश्ना - परिचित, वाकिफ
 

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हिज्र में वस्ल का मजा मिलता है आशिक को,
 
शौक  का मर्तबा जब  हद से गुजर जाता है।

 1.
हिज्र - विरह, वियोग

2.मर्तबा - दर्जा, श्रेणी (ii) बार, दफा (iii) प्रतिष्ठा, इज्जत

 

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   दोस्तों से इस कदर सदमे हुए हैं जान पर,
दिल से दुश्मन की अदावत का गिला जा रहा।


1.अदावत -
दुश्मनी, शत्रुता


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