शेर-ओ-शायरी

आज़ाद अंसारी (Aazad Ansari)

मेरे शौके-सजा का यह खौफनाक अंजाम तो देखो,
 
किसी का जुर्म हो,  अपनी खता मालूम होती  है।
 

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