शेर-ओ-शायरी

आज़ाद बारानवी Aazad Baranavi)

 कहीं धब्बा न लग जाये तेरी बन्दानवाजी पर,
 
हमें भी देख मुद्दत से तेरी महफिल में रहते हैं।

 1.
बन्दानवाजी - अपने चाहने वालों पर इनायत, अपने सेवकों और भक्तों पर कृपादृष्टि
 

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