शेर-ओ-शायरी

आजिज़ इन्दौरवी  (Aajiz Indoravi)

 हमें भी याद रखें जब लिखें तारीख गुलशन की
 
कि हमने भी लुटाया है चमन में आशियाँ अपना।

 1.
तारीख - इतिहास

 

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