शेर-ओ-शायरी

अब्राहिम जोंक  (Abraham Zouq)  Next >>

अब तो घबरा के कहते हैं मर जायेंगे,
 
मर के भी चैन न पाया तो किधर जायेंगे।
 

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ऐ शम्अ तेरी उम्र तवाई है एक रात,
 
रोकर गुजारा दे इसे, या हँसकर गुजार दे।


 1. तवाई -  तवील, लंबी

 

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जब तक मिले न थे जुदाई का था मलाल,
 
अब ये मलाल है कि तमन्ना निकल गई।
 

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जाते हवाए-शौक में हैं, इस चमन से ''जौक ',
 
अपनी बला से बादे -सबा अब कभी चले।
 


 1.
हवाए-शौक-शौक को पूरा करने की ख्वाहिश।

 2.बादे-सबा- सबेरे की पुर्वा हवा।

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