शेर-ओ-शायरी

अदीब मालीगांवी (Adib Maliganvi)  Next >>

अभी आस टूटी नहीं है खुशी की,
अभी गम उठाने को जी चाहता है।
तबस्सुम हो जिसमें निहा जिन्दगी का
वह आंसू बहाने को जी चाहता है।

1.
तबस्सुम - मुस्कान, मुस्कुराहट 2. निहा - छुपा हुआ

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तुम मेरी बात बनाने का इरादा तो करो,
उसके आगे मेरी तकदीर, बने या न बने।
 

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   बेगानावार ऐसे  वो गुजरे करीब से,
जैसे कि उनको मुझसे कोई वास्ता न था।

1.
बेगानावार - बेगानों की तरह

 

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भरी दुनिया में कोई भी नजर नहीं आता अपना,
'
अदीब' इक दौर ऐसा भी गुजर जाता है इंसा पर।
 

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