शेर-ओ-शायरी

  अहमद राही (Ahmad Rahi) 

खयाल था तेरे पहलू में कुछ सकूं होगा,
 
मगर यहाँ भी वही इज्तिराबे-पैहम है।

 1.
इज्तिराबे-पैहम - न खत्म होने वाली बेचैनी या बेताबी या व्याकुलता या बेकरारी


 
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  यह किस मुकाम पै आई जिन्दगी 'राही',
 
कि हर कदम पै अजब बेबसी का आलम है।

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