शेर-ओ-शायरी

अख्तर हरिचन्द (Akhtar Harichand)

  हम भी जब्ते-दर्दे-गम करते रहे।
 
वह भी अपने दिल को समझाते रहे।
 

1.जब्ते-दर्दे-गम - (i) प्रेम की व्यथा का इजहार न करना (ii) गम से प्राप्त कष्ट या पीड़ा को बर्दाश्त करना
 

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हम न आये फिर चमन में लौटकर,
 
  मौसमे-गुल बार-बार आता रहा।
 

1.मौसमे-गुल - बहार का मौसम

 

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