शेर-ओ-शायरी

अख्तर- उल- ईमान  (Akhtar-ul-Imaan)

एक घड़ी, एक पल भी सुख का वक्त बहुत उस राही को,
जीवन जिसका बीत गया हो, कांटों पर चलते-चलते।


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सुनते हैं कि कांटों से गुल तक हैं राह में लाखों वीराने,
कहता है मगर यह अज्मे-जुनूं सहरा से गुलिस्तां दूर नहीं।

1.
अज्मे-जुनूं - दृढ़ संकल्प या पक्के इरादे का जुनून 2. सहरा - वन, जंगल, चटयल मैदान, बियाबन, मरूस्थल

3. गुलिस्तां - उद्यान, बाग, वाटिका, उपवन
 

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