शेर-ओ-शायरी

अख्तर शिरानी  (Akhtar Shirani)  Next >>

 आंखों ने जरे-जर्रे पर सिज्दे लुटाये हैं
क्या जाने, जा छुपा मेरा पर्दानशीं कहाँ?


1.
पर्दानशीं - पर्दे में रहने वाली
 

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इक दिन की बात हो तो उसे भूल जायें हम
नाजिल हों दिल पै रोज बलायें तो क्या करें।
  

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उनको आरमाँ है हमारी मौत का
मर मिटे ऐ जिन्दगी जिनके लिये।

 

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काम आ सकी न अपनी वफायें तो क्या करें
 इक बेवफा को भूल न जायें तो क्या करें?


 

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