शेर-ओ-शायरी

 अमीर  (Ameer)

धबरा न हिज्र में बहुत ऐ जाने-मुज्तरिब,
थोड़ी ही रह गई है, उसे भी गुजार दे।

1.
हिज्र - जुदाई, वियोग 2. जाने-मुज्तरिब - व्याकुल जान
 

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मस्जिद में बुलाते हो हमें जाहिदे-नाफहम,
होता अगर कुछ होश तो मैखाने न जाते।

1.
जाहिदे-नाफहम - नादान धर्मोपदेशक

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