शेर-ओ-शायरी

अनवर इलाहाबादी  (Anwar Ilahabadi)  

 

नसीमे-सुबह बू-ए-गुल से क्या इतराती फिरती है,
जरा सूंघे शमीमे-जुल्फ खुश्बू इसको कहते हैं।

1.
नसीमे-सुबह - सुबह चलने वाली ठंडी और धीमी हवा

2. शमीम - सुगन्ध, खुश्बू, महक

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