शेर-ओ-शायरी

   अरशद काकवी  (Arshad Kaakvi)  

खुला यह राज जब आये वो बाल बिखराये,
 
कि रौशनी से जियादा हसीन हैं साये।
 

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जिन्दगी और ये तमन्नाएं,
 
जल रहा है चराग पानी में।
 

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