शेर-ओ-शायरी

    अर्शी भोपाली (Arshi Bhopali)

कोई इन फूलों की किस्मत देखना,
 
जिन्दगी कांटों में पलकर रह गई।
 

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तेरी नवाजिशे-पैहम का शुक्रिया लेकिन,
 
वह क्या करे जिसे कुरबत भी रास न आ सके।

 1.
नवाजिशे-पैहम - निरंतर कृपा 2. कुरबत - नजदीकी
 

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