शेर-ओ-शायर

आर्ज़ू लखनवी (Arzoo Lakhnawi)  Next >>  

'आरजू' जाम लो, झिझक कैसी,
 
पी ली और दहशते-गुनाह गई।
 

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आराम के थे साथी क्या - क्या जब वक्त पड़ा तो कोई नहीं,
 
सब दोस्त हैं अपने मतलब के दुनिया में किसी का कोई नहीं।
 

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इज्जत कोई और शै है, नुमाइश कोई और चीज,
 
यूँ तो खुरोश के सर पर भी ताज होता है।

 
1. शै - चीज 2. खुरोश - मुर्गा
 

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उनकी बेजा भी सुनूं, आप बजा भी न कहूं,
 
आखिर इन्सान हूँ मैं भी, कोई दीवार तो नहीं।

 1.
बेजा - अनुचित, नामुनासिब 2. बजा - उचित, मुनासिब
 

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