शेर-ओ-शायरी

     असगर गोंडवी (Asgar Gondavi)

चला जाता हूँ हँसता-खेलता मौजे-हवादिस से,
 
अगर आसानियाँ हों जिन्दगी दुश्वार हो जाये।

 1.
मौजे-हवादिस  दुर्घटनाओं या हादसों की लहरें या तरंगें
 

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जीना भी आ गया, मुझे मरना भी आ गया,
 
पहचान ने लगा हूँ, तुम्हारी नजर को मैं।
 

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बुलबुलो-गुल पै जो गुजरी हमको उससे क्या गरज,
 
हम तो गुलशन में फकत रंगे - चमन देखा किए।
 

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यहाँ तो उम्र गुजरी है मौजे- तलातुम में,
 
वो कोई और होंगे सैरे-साहिल देखने वाले।

 
1.मौजे-तलातुम - तूफानी लहरों के बीच 2.सैरे-साहिल - किनारे की सैर

 

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