शेर-ओ-शायरी

     असर अज़ीमाबादी  (Asar Azeemabadi)  

फिर गये आप मेरे कूचे से,
दो कदम पै गरीबखाना था।

 1.
कूचा - गली
 

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मेरे दिल में तड़प है पीने की,
 
तेरे हाथों में जाम है साकी।
 

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