शेर-ओ-शायरी

असर सहबाई (Asar Sahbai)  

अहरमन की बंदगी, जिक्रे-खुदा के साथ-साथ,
हर जमाने में बअन्दाजे- दिगर होती रही।

1.
अहरमन - शैतान 2.बंदगी - पूजा, इबादत, आराधना

3.बअन्दाजे-दिगर - अपने-अपने दंग से
 

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खुदा की देन है जिसको नसीब हो जाये,
हर एक दिल को गमे-जाविदाँ नहीं मिलता।

1.
गमे-जाविदाँ - न खत्म होने वाला गम
 

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गो सकूं की जुस्तजू भी उम्र भर होती रही,
दिल की दुनिया मुंतशिर ही मुंतशिर होती रही।
अहरमन की बंदगी जिक्रे खुदा के साथ साथ,
हर जमाने में बअन्दाजे - दिगर होती रही।
 


1.
गो - यद्यपि, अगरचे 2.जुस्तजू - तलाश
3.
मुंतशिर - (i) बिखरना, तितर-बितर, अस्त-व्यस्त (ii) परेशान, उद्विग्न
4.
अहरमन - शैतान 5.बंदगी - पूजा, इबादत

6.बअन्दाजेदिगर- -अलग-अलग ढंग से
 

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