शेर-ओ-शायरी

अज़ीज़ लखनवी (Aziz Lakhnavi)  Next >>

इतना तो सोच जालिम जौरो-जफा से पहले,
यह रस्म दोस्ती की दुनिया से उठ जायेगी।

1.
जौरो-जफा - अत्याचार, अन्याय, जुल्मो-सितम
 

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उनको सोते हुए देखा था दमे-सुबह कभी,
क्या बताऊं जो इन आंखों ने समां देखा था।

1.
दमे-सुबह - सुबह के वक्त
 

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एक मजबूर की तमन्ना क्या,
रोज जीती है, रोज मरती है।
 

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कफन बांधे हुए सर से आये हैं वर्ना,
हम और आप से इस तरह गुफ्तगू करते।
जवाब हजरते-नासेह को हम भी कुछ देते
जो गुफ्तगू के तरीके से गुफ्तगू करते।

1.
हजरत - किसी बड़े व्यक्ति के नाम से पहले सम्मानार्थ लगाया जाने वाला शब्द 2. नासेह - नसीहत करने वाला, सदुपदेशक
 

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