शेर-ओ-शायरी

नाजिश प्रतापगढ़ (Nazish Pratapgarhi)

ऐ हासिले-खुलूस बता क्या जवाब दूँ,
दुनिया यह पूछती है कि मैं क्यों उदास हूँ।

1.
हासिले-खुलूस - मुहब्बत का निष्कर्ष या निचोड़
 

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मेरे दर्द में निहाँ है वह निशाते-जाविदानी,
कि निचोड़ दूँ जो आहें, टपक पड़े तबस्सुम।

1.
निहाँ - छिपा हुआ, निहित
2.
निशाते-जाविदानी - शाश्वत आनन्द, हमेशा रहने वाली खुशी
3.
तबस्सुम - मुस्कान, मुस्कुराहट
 

*****


यह और बात है कि मैं शिकवा न कर सकूँ,
लेकिन तेरी निगाह को पहचानता हूँ मैं।
 

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