दुश्मन भी
हो तो दोस्ती से पेश आये हम,
बेगानगी से
अपना
नहीं आश्ना मिजाज।
1.बेगानगी
-
(i)
परायापन
(ii)
अनजानापन,
ज्ञान का न होना,
बेइल्मी
2.आश्ना
-
परिचित,
वाकिफ
*****
हिज्र में वस्ल का मजा मिलता है आशिक को,
शौक
का मर्तबा जब
हद से गुजर जाता है।
1.हिज्र
-
विरह,
वियोग
2.मर्तबा - दर्जा, श्रेणी (ii) बार, दफा (iii) प्रतिष्ठा, इज्जत
*****
दोस्तों से इस कदर सदमे हुए हैं
जान पर,
दिल से दुश्मन की अदावत का गिला जा रहा।
1.अदावत
-
दुश्मनी, शत्रुता
*****