उम्मीदी -
नाउम्मेदी का वहम होना वही जाने,
कि जिसने कश्तियों को डूबते देखा हो साहिल पर।
1.साहिल - किनारा, तट
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उम्रे-दराज मॉंगकर लाये थे चार दिन
दो आरजू में कट गये, दो इन्तिजार में
कितना है बदनसीब 'जफर' दफ्न के लिये
दो गज जमीं भी न मिली कू-ए-यार में।
-बहादुर शाह 'जफर'
1. दराज - लंबी, तवील 2. कू-ए-यार
- प्रेमिका की गली
[यानी स्वदेश में या अपने देश में
जहाँ उसकी पत्नी ( बहादुर शाह ज़फर की ) रहती थी]
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कई मिल रेत को
काटकर कोई मौज फूल खिला गई,
कोई पेड़ प्यास से मर रहा है नदी के पास खड़ा हुआ।
-अब्दुल हमीद 'अदम'
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कफस से छूटकर पहुँचे न हम दीवारे-गुलशन तक,
रसाई आशियाँ तक किस तरह बेबालोपर होती।
-जलील मानिकपुरी
1.कफस - पिंजड़ा 2. रसाई -
पहुँच 3. बेबालोपर - जिसके पास
जीविका का कोई साधन न हो
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