कफस से
छूटने पै शाद थे हम कि लज्जते-जिन्दगी मिलेगी,
यह क्या खबर थी कि बहारे-गुलशन लहू में डूबी हुई मिलेगी।
-अब्दुल हमीद 'अदम'
1. कफस - पिंजड़ा, कारावास
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कभी जो
मैंने मसर्रत का एहतिराम किया,
बड़े तपाक से गम ने मुझे सलाम किया।
1. एहतिराम - आदर, इज्जत, सम्मान
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काविशे-सैयाद,
जोरे-बांगबाँ, खारे-खिजाँ,
कैसे -कैसे दाग लेकर हम चमन से जायेंगे।
1.काविश - चिंता, फिक्र 2.सैयाद
- बहेलिया, चिड़ीमार 3.जोर -
जुल्म,
ज्यादती 4.बागबाँ -
माली 5.खार -
कांटे 6.खिजाँ- पतझड़ ऋतु
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खूब था पहले से
होते जो हम अपने बादाख्वाह,
कि भला चाहते हैं, और बुरा होता है।
-मिर्जा गालिब
1.खूब - सुन्दर, उत्तम 2.
बादाख्वाह - बुरा चाहने वाला
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