शेर-ओ-शायरी

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ऐ अजल तुझसे यह कैसी नादानी हुई,
फूल वो तोड़ा, चमन भर में वीरानी हुई।


1.अजल - मृत्यु, मौत
 

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गुबार उठता है यह कहता हुआ गोरे – गरीबाँ से,
जहाँ में एक दिन सबका यही अंजाम होता है।

-'आर्जू' लखनवी

1.गुबार - (i) धूल (ii) मनोमालिन्य, दिल का मैल

2. गोरे गरीबाँ - गरीब की कब्र या समाधि
 

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जिन्दगी के दाम इतने गिर गये कुछ गम नहीं,
मौत की बढ़ती हुई कीमत से घबराता हूँ मैं।

-नीरज जैन

 

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जिन्दगी क्या है अनासिर का जुहूरे -तर्तीब,
मौत क्या है, इन्हीं अजजाँ का परीशां होना।

- 'चकबस्त' लखनवी


1.अनासिर - पंचभूत या पंचतत्व - आग, पानी, हवा, मिटटी और आकाश
2. जुहूर -. जाहिर होना, प्रकट होना
3. तर्तीब - चन्द चीजों का यथास्थान ठीक-ठीक रखना, सज्जा, दरूस्ती

(ii) क्रम, सिलसिला
4. अजजाँ -. अंश, खंड, टुकड़े 

5.परीशां -(i) अस्त-व्यस्त, तितर-बितर (ii) व्याकुल, आतुर, बेचैन
 

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