शेर-ओ-शायरी

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मौतो-हस्ती की कशाकश में कटी उम्र तमाम,
गम ने जीने न दिया, शौक ने मरने न दिया।


1. कशाकश - खींचा-खींची, आपाधापी

 

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लाई हयात आई कजा ले चली चले,
अपनी खुशी आये न अपनी खुशी चले।
अच्छा तो है यही कि जहाँ में न दिल लगे,
लेकिन तो क्या करें जो न ये बेदिली चले।
दुनिया ने किसका राहे-फना में दिया है साथ,
तुम भी चले चलो यूँ ही जब तक चली चले।

-अब्राहम 'जौक'


1. हयात - जिन्दगी 2. कजा - मृत्यु, मौत 3. राहे - फना- मौत के रास्ते में

 

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वक्फाए –मर्ग अब जरूरी है,
उम्र तय करते थक रहे हैं हम।
-मीरतकी मीर


1.वक्फा -. ठहराव, विराम, इन्टरवल 2. मर्ग - मौत, मृत्यु

 

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सूँघ कर कोई मसल डाले तो ये है गुल की जीस्त,
मौत उसके वास्ते डाली
पै कुम्हलाने में है।
-आनन्द नारायण मुल्ला


1.जीस्त - जिंदगी

 

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हम उसी जिन्दगी के दर पै है,
मौत है जिसके पासबानों में।


1. दर - दरवाजा, द्वार 2 पासबान - निरीक्षक,निगाराँ,द्वारपाल,प्रहरी
 

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