करने का नहीं
कद्र कोई इससे जियादा,
रखता हूँ कलेजे में तेरे तीरे-नीमकश को।
-बिस्मिल
1.तीरे-नीमकश - वह तीर, जो घाव में
आधा खींचकर छोड़ दिया गया है।
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कुछ तुम्हारी
निगाह काफिर थी,
कुछ मुझे भी खराब होना था।
-मजाज लखनवी
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कुछ नहीं कहती
निगाहें मगर,
मगर बात पहुँची है कहाँ से कहाँ।
-'फिराक' गोरखपुरी
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