मस्ती निगाहे-नाज की कैफे-शबाब में,
जैसे कोई शराब मिला दे शराब में।
-'सब्र' मख्दूमपुरी
1.निगाहे-नाज - नाजो-अंदाज की
दृष्टि
2.कैफे-शबाब -
जवानी या यौवन का नशा या सुरूर
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'मीर' इन नीमबाज आंखों में सारी मस्ती शराब की-सी है,
खिलना कम-कम कली ने सीखा है तेरी आंखों की नीमबाजी है।
-मीरतकी मीर
1. नीमबाज - अधखुली, आधी खुली हुई
आँख, नशीली आँख
2.नीमबाजी -
अधखुलापन
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मुखातिब
हैं साकी की मख्मूर नजरें,
मेरे जर्फ का इम्तिहाँ हो रहा है।
1.मुखातिब -
बोलने वाला, बात करने वाला 2.मख्मूर -
नशीली, मदभरी, नशे में चूर 3.जर्फ -
सहन-शक्ति, सहनशीलता, सब्र, धैर्य
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