दिखा के मदभरी आंखें कहा ये साकी ने,
हराम कहते हैं जिसको यह वो शराब नहीं।
-'खुमार' बाराबंकवी
1.साकी - शराब पिलाने वाली
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दीवानावार दौड़ के कोई लिपट न जाये,
आंखों में आंखें डालकर देखा न कीजिए।
-यास और यगाना चंगेजी
1.दीवानावार - दीवानों की तरह,
अदबदाकर
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देखा किये वह
मस्त निगाहों से बार-बार,
जब तक शराब आई कई दौर चल गये।
-'शाद' अजीमाबादी
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देखा है मेरी नजरों
ने, एक रंग छलकते पैमाने का,
यूँ खुलती है आंख किसी की, जैसे खुले दर मैखाने का।
-महेशचन्द नक्
1. पैमाना - शराब पीने का गिलास,
पान-पात्र (यानी माशूक की नशीली आँखें) 2.दर -
दरवाजा 3. मैखाना -
शराबखाना, मदिरालय
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