गमजे भी हैं
खूरेज, निगाहें भी हैं सफ्फाक,
तलवार के बांधे से तो कोई कातिल नहीं होता।
-मिर्जा दाग
1.गमजा -
आँख का इशारा
2.खूरेज
- खून बहाने वाले, निर्दय, बेरहम
3.सफ्फाक - रक्तपाती, खून बहाने
वाला, निष्ठुर, संगदिल, अत्याचारी, जालिम
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गुलों की गोद
में जैसे नसीम आकर मचल जाए,
उसी अंदाज से उन पुरखुमार आंखों में ख्वाब आया।
-'असर' लखनवी
1. नसीम - ठंडी और धीमी हवा
2.पुरखुमार - नशे में चूर, मस्त
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चारासाजों! तुम
पहले उनकी नजर को देखो,
फिर मेरे दिल को देखो, मेरे जिगर को देखो।
-'दिल' शाहजहाँपुरी
1.चारासाज - चिकित्सक
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