चाल मस्त, नजर मस्त, अदा में मस्ती,
जब वह आते हैं लूटे हुए मैखाने को
-'जलील' मानिकपुरी
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छलकता भी रहे हमदम, रहे लबरेज भी साकी,
तेरी आंखों के सद्के हमने वो भी जाम देखे हैं।
-हजीं
1.लबरेज - ऊपर तक भरा हुआ,
परिपूर्ण, लबालब
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जब मिली आंख होश
खो बैठे,
कितने हाजिरजवाब हैं हम लोग।
-'असर' लखनवी
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जाहिद उन आंखों
की टपकती हुई मस्ती,
पत्थर में गढ्ढा डाल के पैमाना बना दें।
-'आर्जू' लखनवी
1.जाहिद - संयमी, विषय-विरक्त, संयम,
नियम और जप-तप करने वाला व्यक्ति 2.पैमाना -
शराब का गिलास, पान-पात्र
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