खूने-हजार -हसरतो - अरमाँ के बावजूद,
उसकी नजर में हम न
समायें
तो क्या करें।
-'असर' लखनवी
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खूबिए-नाज तो देखो कि उसी ने न सुना,
जिसने अफसाना बनाया मेरे आफसाने को।
-असर लखनवी
1.खूबिए-नाज - नाजो-अदा या अभिमान की
खूबी
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गिने जा रहे हैं मेरे जख्मे-दिल,
कोई तीर शायद खता हो गया है।
-'जिगर' मुरादाबादी
1.खता - त्रुटि, चूकना यानी निशाने पर
न लगना
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गैर लें महफिल में बोसे जाम के,
हम रहें यूँ तिश्नालब पैगाम के
खत लिखेंगे गरचे मतलब कुछ भी हो
हम तो आशिक हैं तुम्हारे नाम के।
-मिर्जा 'गालिब'
1.तिश्नालब - प्यासा, पिपासित, तृषित
2.पैगाम - संदेश, संदेशा, पयाम
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