गैरों
पे हो रही हैं हजारों नवाजिशें,
अफसोस हम सितम के भी काबिल नहीं रहे।
1..नवाजिशें -
मेहरबानियाँ, इनायतें
2.सितम - जुल्म, अत्याचार
*****
गैरों की बात छोड़िए गैरों से क्या मिला,
अपनों ने क्या दिया हमें, अपनों से क्या मिला।
*****
गैरों से कहा तुमने, गैरों से सुना तुमने,
कुछ हमसे कहा होता, कुछ हमसे सुना होता।
-हसरत चिराग हसन
*****
गैरों को क्या पड़ी है रूसवा मुझे करें,
इन साजिशों में हाथ किसी आशना का है।
1.रूसवा –
बदनाम 2.आशना -
परिचित, अपना
*****
<< Previous page - 1-2-3-4-5-6-7-8-9-10-11-12-13-14-15-16-17-18-19-20-21-22-23-24-25-26-27-28-29-30-31-32-33-34-35-36-37-38-39-40-41-42-43-44-45 Next >>