तुझको सौ सौ तरह से याद करके,
तुझको सौ सौ तरह से भुलाता हूँ।
-फिराक गोरखपुरी
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तुम मेरे लिए कोई इल्जाम न ढूँढ़ो
चाहा था तुम्हे, यही इल्जाम बहुत है।
-साहिर लुधियानवी
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तुम्हें गैरों से कब फुरसत, हम अपने गम
से कब खाली,
चलो बस हो चुका मिलना, न तुम खाली, न हम खाली।
-हसरत
मोहनी
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तूने जब से निगाह फेरी है,
ढूँढ़ता हूँ शराबखाने को।
-पारसा
कौसरी
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