दहर में क्या-क्या
हुए हैं इन्किलाबाते-अजीम,
आसमाँ बदला, जमीं बदली, न बदली खू-ए-दोस्त।
-'शाद' अजीमाबादी
1.दहर - दुनिया, जमाना
2.इन्किलाबाते-अजीम -बड़े-बड़े
परिवर्तन
3.खू-ए-दोस्त - दोस्त का स्वभाव
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दर्द-ए-दिल, सोजे-जिगर, अश्के-रवाँ, दागे -फिराक
सच तो यह है आपके एहसाँ है मुझपर बेशुमार।
-त्रिलोकचन्द महरूम
1.सोजे-जिगर - दिल की तपिश या जलन
2.अश्के-रवाँ - बहते आंसू
3.दागे –फिराक - विरह का गम
4.बेशुमार -
अनगिनत, असंख्य, बहुत अधिक
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दिल अभी पूरी
तरह टूटा नहीं,
दोस्तों की मेहरबानी चाहिए।
-अब्दुल हमीद 'अदम'
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दिल की वीरानी
का मज्कूर क्या,
यह नगर सौ मर्तबा लूटा गया।
-मीरतकी मीर
1.मज्कूर - जिक्र, चर्चा
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